Monday, August 31, 2009

तुलसी शालिग्राम विवाह महिमा :पं चंद्रसागर

तुलसी शालिग्राम विवाह महिमा :पं चंद्रसागर
संपूर्ण विश्वों में जिस देवी की कोई तुलना नहीं है, अतः तुलसी नाम से विख्यात विष्णुप्रिया
अपनी अनंत महिमा के लिए शाश्त्रों में पूजित हैं कार्तिक पूर्णिमा तिथि को तुलसी का
मंगलमय प्राकट्य हुआ था, इसी दिन भगवान श्री हरि ने उनकी पूजा सम्पन्न की थी
श्रीमद देवी भागवत के अनुसार जो व्यक्ति कार्तिक महीने में भगवान विष्णु को तुलसी
पत्र अर्पण करता है , वह दस हज़ार गायों के दान का फल निश्चित रूप से प्राप्त करता
है (देवी भा ९-२५-३६)
तुलसी के प्रादुर्भाव का संक्षिप्त वर्णन इस प्रकार है राजा धर्मध्वज की पत्नी माधवी के
गर्भ से एक अतुलनीय अनुपम सौंदर्य वाली कन्या का जन्म हुआ जिसे विद्वान लोग
तुलसी के नाम से पुकारते हैं तुलसी ने बदरीवन में दिव्या एक लाख वर्ष तक तप
किया और ब्रह्मा जी से निवेदन किया, हे तात ! में पूर्व जन्म में गोलोक में श्री कृष्ण
की सहचरी तुलसी नाम की गोपी थी एक दिन रासमंडल में रास की अधिष्ठात्री देवी
श्री राधा ने मुझे श्री कृष्ण के साथ विहार करते हुए देखकर शाप दे दिया -" तुम मनुष्य
योनी प्राप्त करो "
तब गोविन्द ने मुझसे कहा - भारत वर्ष में जन्म लेकर तपस्या करके तुम ब्रम्हा जी के
वरदान से मेरे अंश स्वरुप चतुर्भुज विष्णु को पतिरूप में प्राप्त करोगी अतः आप मुझे
श्री हरि को पति रूप में प्राप्त करने का वर दीजिये
ब्रह्माजी ने कहा -देवी उसी गोलोक में एक सुदामा नाम का गोप था जो तुम पर आसक्त था
तुम्हारे प्रति कामासक्त भावना के कारन राधा के शाप से वह सुदामा गोप इस समय समुद्र
में शंखचूड नामक दैत्य के रूप में विख्यात है हे देवी ! अब इस जन्म में तुम उसी सुदामा
गोप की पत्नी बनोगी और बाद में शान्तस्वरूप भगवान नारायण का वरण करोगी
दैव योग से उन्ही भगवन नारायण की शाप से तुम अपनी कला से विश्व को पवित्र करने
वाली पावन वृक्ष रूप में प्रतिष्ठित होयोगी तुम्हारे विना की गयी सभी देवतायों की
पूजा व्यर्थ समझी जायेगी वृन्दाबन में तुम "वृन्दावनी " नाम से विख्यात रहोगी
तदन्तर दानव शंखचूड ने गान्धर्व -विवाह के अनुसार उस तुलसी को पत्नी रूप में
ग्रहण कर लिया शंखचूड के आतंक से भयभीत देवगन भगवान विष्णु के पास गए

भगवान विष्णु ने कहा - " जिस समय उसकी पत्नी का सतित्व नष्ट होगा ,
उसी समय उसकी मृत्यु होगी भगवान शंकर स्वयं मेरे त्रिशूल से उसका वध करेंगे "
तदन्तर देवताओं का कार्य सिद्ध्य करने में सदा तत्पर रहने वाले भगवान श्री हरी वैष्णवी माया के द्वारा शंखचूड का रूप धारण कर उसकी पत्नी का पातिव्रत धर्म नष्ट करके शंखचूड को मारने की इच्छा से तुलसी के घर चले गए हास – परिहास
करते हुए जब तुलसी के साथ रमण करने लगे तो तुलसी ने अपने मन में विचार
करके सब कुछ जान लिया और कहा - तुमने छल पूर्वक मेरा सतीत्व नष्ट किया ,
अतः मै तुम्हे शाप देती हूँ -
आपने छल पूर्वक मेरा धर्म नष्ट करके मेरे स्वामी को मार डाला आप पाषाण -ह्रदय वाले
हैं तथा दयाहीन हो गए हैं अतः हे देव ! आप इसी समय पृथ्वी लोक में पाषाण रूप
हो जाएँ
इस पर श्री हरि ने कहा - हे देवी ! तुमने भी मुझे पति रूप में प्राप्त करने हेतु कठोर
तप किया है , अतः इस शरीर का त्याग करके दिव्य देह धारण करके मेरे साथ मेरे
ह्रदय में लक्ष्मी में रूप में स्थापित हो जाओ तुम्हारा यह शरीर गण्डकी नदी के रूप
में प्रसिद्ध होगा
तुमारा केश समूह पुण्य वृक्ष के रूप में प्रतिष्ठित होगा तुम्हारे केश से उत्पन्न
वह वृक्ष " तुलसी " के नाम से प्रसिद्ध होगा ( देवी भाग ९-२४-३२)
मै भी तुम्हारे शाप से पाषाण बनकर भारत वर्ष में गण्डकी नदी के तट के समीप निवास
करूँगा वहां रहने वाले करोंडों कीट अपने तीक्ष्ण दान्तरुपी श्रेष्ठ आयुधों से काट - काटकर
उस शिला के गड्ढे में मेरे चक्र का चिह्न बनायेंगे
जिसमे एक द्वार का चिह्न होगा, चार चक्र होंगे और जो वनमाला से विभूषित होगा तुलसी
वह नविन के मेघ के समान वर्ण वाला पाषण "लक्ष्मी- नारायण " नाम से प्रसिद्द
होगा
जो फल दस हज़ार गायों का दान करने से होता है , वही फल कार्तिक मास में
तुलसी के पत्र के दान से प्राप्त हो जाता है (देवी भाग ९-२४-४१)
जो मनुष्य तुलसी -काष्ठ से निर्मित माला को धारण करता है, पद-पद पर
अश्वमेध यज्ञ का फल निश्चय ही प्राप्त करता है(देवी भाग९-२४-४५)
तुलसी धारण करने से सम्बंधित कुछ विधि -निषेध का पालन भी
अत्यावश्यक है शास्त्रानुसार -पूर्णिमा, अमावश्या , द्वादशी , सूर्य संक्रांति, रात्रि
दोनों संध्याएँ , अशौच ,तथा अपवित्र समयों में, रात के कपड़े पहने
हुए तथा शरीर में तेल लगाकर जो लोग तुलसी के पत्र तोड़ते हैं ,
वे साक्षात् श्री हरि का मस्तक ही काटते हैं (देवी भाग ९-२४-५०)\
शालग्राम शिला का एक नाम "दामोदर" भी है जो पाषाण गोलाकार तथा दो
चक्रों से सुशोभित हैं उसे "दामोदर" स्वरुप जानना चाहिए (देवी भाग ९-२४-६३)
इसलिए कार्तिक मास में दामोदर परिक्रमा का विशेष माहात्म्य है कार्तिक मास
में परिक्रमा करते हुए जो दामोदर भगवान को तुलसी पत्र अर्पण करता है , वह
समस्त तीर्थों का फल प्राप्त कर लेता है
चरों वेदों के पढने तथा तपस्या करने से जो पुण्य प्राप्त होता है , वह पुण्य शालग्राम
के दामोदर स्वरुप पूजन से प्राप्त हो जाता है
तुलसी के आठ पवित्र नामों का स्मरण करने से समस्त पाप क्षीण हो जाते हैं
ये नाम इस प्रकार है - वृंदा, वृन्दबानी, विश्वपूजिता, विश्वपावनी, पुष्पसारा , नंदनी ,
तुलसी तथा कृष्णजीवनी
तुलसी -शालग्राम विवाह उत्सव मानाने से स्त्रियों को कभी वैधव्य का सामना नहीं
करना पड़ता , यह जीवन के समस्त अमंगलों को समाप्त करके अभीष्ट की
प्राप्ति करा देता है और समस्त मनोकामनाएं पूर्ण करके हरि की शरणागति
प्रदान करा देता है
तुलसी जी की अनंत महिमा का वर्णन कौन कर सकता है
तुलसी के औषधीय गुणों का वर्णन तो आयुर्वेद में विस्तार से किया गया
है सर्दी हो ,जुकाम हो अथवा खांसी हो , तुलसी का रस अमृत -तुल्य
होता है
लगभग २० वर्ष पहले भोपाल में गैस रिसाव काण्ड हुआ था जिसमे हजारों
लोग मारे गए थे एक अमेरिकी रिसर्च टीम ने शोध में पाया - जिन घरों के
आँगन में तुलसी का कुंडा था, उन घरों में किसी की मृत्यु नहीं हुयी थी
तुलसी से उत्सर्जित ऑक्सिजन में तो छूत के रोगाणु व कीटाणु तत्काल नष्ट
हो जाते हैं और संपूर्ण वातावरण पवित्रमय हो जाता है चंद्रसागर , २९-०८-०९


Tuesday, May 19, 2009

दंभ लोभ और अशिष्टता ही 'भाजपा ' के पतन का कारण :

१ )लोकतंत्र में लोकमत ही सर्वोपरि होता है .ऐसे में चुनाव से पूर्व ही अपने
को पि ऍम इन वेटिंग कहना अति दंभ का परिचायक है.
2) सन् 2004 में समय से छह माह पूर्व ही चुनाव कराकर भाजपा
ने अति लोभी और सत्ता लोलुप होने का परिचय दे दिया था .
उस समय विधान सभा के चुनाव में तीन प्रदेशों (राजस्थान , मध्य प्रदेश , गुजरात )
में बहुमत पाकर भाजपा अति लालच में डूब गया और
अपना छह माह का शासन भी हाथ से गवां बैठा ,
3) इस चुनाव में तो मानों भाजपा के बड़े नेताओं ने शपथ ले लिया हो की हम अशिष्ट
और अभद्र भाषा का ही प्रयोग करेंगे : जबकि कांग्रेस का कोई भी बड़े नेता ने पलट कर जबाब भी नहीं दिया . कुछ उदाहरण देखिये :- a ) अडवानी कहते हैं - ' प्रधान मंत्री कमजोर हैं ......'
b) नरेंद्र मोदी कहते हैं ;- प्रियंका बुढ़िया है , फिर कहा गुड़िया है '
क) वरुण गाँधी ने तो सारी हदें पार कर दी . हिंदुत्व पर किस भारतवासी को को गर्व
नहीं होता, पर इसके लिए हाथ काटने की धमकी देने की क्या आवश्यकता है ?
4) श्री राम का नाम तो अब भाजपा के मुख से अपशब्द जैसा लगता है ,
भबिष्य में भाजपा को राम , हिंदुत्व और धर्म की राजनीति छोड़कर केवल
विकास , महंगाई और भ्रष्टाचार उन्मूलन जैसे मुद्दों पर राजनीति करनी चाहिए ,
5) शास्त्रों में एक कुशल राजा का लक्षण बताते हुए कहा गया है ;- अ) जिसके राज्य
में कोई भूखा और निर्वस्त्र न रहे . ब) किसी निर्धन के साथ भी अन्याय न हो .
स) कोई प्रजा निराश्रित न रहे अर्थात् सबके सिर पर छत हो .
6) अब हम सब भारत वासी इस नई सरकार से पूछ रहे हैं ;- क्या अब भारत का गरीब
मिट्टी का तेल, गैस , गेहूं , चावल , चीनी सरसों का तेल व घी खरीद पायेगा ?
ये मूलभूत प्राण रक्षक वस्तुयें यदि सस्ती हो जाए तो सबकी दुआएं मिलेंगी .
७) भाजपा पराजय की आत्म -मंथन करें और कांग्रेस विनम्रता
के साथ विजय मुकुट की रक्षा करे .
यही प्रभु से प्रार्थना है . chandrasagar

Wednesday, March 11, 2009

"होली का राष्ट्रीय चिंतन "

भक्ति के रंग में सराबोर होकर भक्ति के बाधक तत्वों को जलाकर नष्ट कर देना ही
होलिका दहन है.
संकट में अथवा किसी भी प्रतिकूल स्थिति में प्रहलाद से "श्री कृष्णः शरणम
ममः " का पाठ और दृढ हो जाता है
एक बार श्रद्धा व विश्वास का आश्रय लेकर यदि नारायण की शरणागति
मिल जाये तो क्रोध व मोह रूपी होलिका हमारा कुछ भी नहीं बिगाड़ सकती .
परमात्मा के साथ सम्बन्ध स्थापित करने के लिए शास्त्रानुकूल आचरण
अति आवश्यक है.
प्रातः ब्रम्ह्मूहुर्त में उठना ,सूर्य को अर्घ्य देना , माता -पिता का
चरण स्पर्श करना , संध्या वन्धन करना ये सब हमें प्रभु के निकट
ले जाकर अति आनंद की अनुभूति कराता है.
आनंद प्राप्त करना ही मानव जीवन का परम लक्ष्य है .
आनंदहीन व्यक्ति का जीवन नीरस होता है और वह संपन्न होकर भी
दरिद्र कहलाता है .
शास्त्रानुकूल आचरण करने वाले का लक्ष्मी सदैव आदर करती है.
प्रह्लाद को लक्ष्मी ने स्वयं अपने हाथों से भोजन कराया .
जब हिरण्य कशिपू ने प्रहलाद को बंदी बनाया दिया था .
अब आप ही बताइए जब आप पर लक्ष्मी की कृपा होगी तो आप
संपन्न होंगे और जब आप संपन्न होंगे तो समाज संपन्न होगा
और जब समाज संपन्न होगा तो क्या देश संपन्न नहीं होगा . ?

Tuesday, February 10, 2009

दोनों मुस्लिम भाइयों (युसूफ व इरफान ) की जय हो :

दोनों मुस्लिम भाइयों (युसूफ व इरफान ) की जय हो :--------------------------------------------------------------- श्रीलंका को तीन विकेट से मात देने वाले दोनों पठान बंधुओं ने आज सवासौ करोड़ हिंदुस्तानिओं का सर गर्व से ऊँचा कर दिया है जब दोनों पठान बंधू खेल रहे थे तब हम हिंदूओं का दिल भी खुशी से धड़क रहा था तब हम हिंदू - मुस्लिम में भेद-भाव क्यों करते हैं श्रीराम सेना व विश्व हिंदू परिषद् जैसे संगठनों को कट्टर भाषा का त्याग कर प्रेम व सौहार्द की भाषा अपनानी चाहिए
चंद्रसागर

मै कथा क्यों सुनाता हूँ :

मै कथा क्यों सुनाता हूँ :
१) जीवन में आनंद व खुशी कौन नही चाहता
यदि सत्संग व पूजा पाठ से मन को
खुशी मिलती है
तो आपत्ति क्यों
२) लोग शराबबंदी का आन्दोलन चलाते हैं किंतु मानता कोई नही
व्यास -पीठ से एकबार आहवान मात्र से लोग पीना छोड़ देते हैं
क्या इह पर्याप्त नही
३) देश में लूट व बलात्कार की घटनाएं निरंतर बढ रही हैं
सत्संग के द्वारा मनुष्य की दृष्टि व सोच
बदल
जाती है
जब काम दृष्टि
राम - दृष्टि में परिणत हो जाता है
तो वहा
परनारी में भी माँ- बहन का दर्शन करता है
क्या यह बहुत बड़ा उपकार नही

४) जितनी अवधि वह सत्संग में विराजता है
उतनी अवधि तक
वह बीडी -सिगरेट
तम्बाकू
मांस-मदिरा
यहाँ तक कि वह मच्छर मारने से भी
बचता है
व्यक्ति को पाप करने से रोकना क्या पाप है
५) टी
वी. के माध्यम से नग्न- संस्कृति के चलते यदि शास्त्र के माध्यम से
भारतीय - संस्कृति का प्रचार - प्रसार किया जाय तो इसमे ग़लत क्या
शास्त्र- सम्मत आचार-विचार से तो मनुष्य कि आयुष्व कि वृद्धि करके
स्वस्थ जीवन जीने का मंत्र प्रदान करता है.
६) आज वृद्ध माता -पिता उपेक्षित हो रहे हैं
यदि भक्ति का
पाठ पढाकर उन्हें पितृभक्त व देशभक्त बनाया जाए तो क्या यह
सबसे बड़ी राष्ट्रभक्ति नही होगी
७) बलि प्रथा
दहेज़ प्रथा
बाल विवाह आदि कुप्रथाओं को शास्त्रीय माध्यम
से रोकना क्या अपराध है
और यह सब मै भागवत कथा के माध्यम से करता हूँ

और अन्तिम श्वांस तक करता रहूँगा
मेरे इस आन्दोलन का नाम है " अंतर्राष्ट्रीय भगवत्प्रेम प्रचार समिति "
इस आन्दोलन में शामिल होने के लिए संपर्क करें.
शेष भगवत कृपा !
मुझे गर्व है कि मै हरि कथा के माध्यम से राष्ट्र की सेवा कर
रहा हूँ चंद्रसागर

Sunday, February 8, 2009

मूर्खों का कट्टरवाद ही आतंकवाद है :

मूर्खों का कट्टरवाद ही आतंकवाद है :
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आज देश में सर्वत्र "वाद " का प्रभुत्व छाया हुआ है , जैसे - जातिवाद, भाषावाद , पंथवाद, क्षेत्रवाद ,
और सबसे ऊपर है -आतंकवाद
कोई मूर्ख कहता है - महाराष्ट्र मराठिओं का है , बिहार बिहारिओं का है ,
तमिलनाडु तमिलों का है , बंगाल बंगालिओं का है , तो फ़िर बताईये -
हिंदुस्तान किसका है ?
जब आजादी की लड़ाई में हिंदू- मुस्लिम , गुजराती, मराठी, बंगाली,
पंजाबी सभी का सहयोग रहा है , तो फ़िर संपूर्ण भारत पर सबका
समान अधिकार क्यों नही ?
एक शब्द और है - "धार्मिक -कट्टरवाद "
पता नही किस मूर्ख ने इस शब्द को प्रचलित किया
क्यों की व्यक्ति यदि धार्मिक है तो कट्टर नही होगा,
और यदि कट्टर है तो धार्मिक नही होगा
धार्मिक सदैव सहिष्णु और सुहृद होता है , वह कभी कट्टर हो ही नही सकता
कट्टरवाद का ही दूसरा नाम -आतंकवाद है
इसलिए समस्त "वाद" भूलकर केवल मानव सेवा का लक्ष्य मानकर
प्रभु - कृपा से आबाद रहिये मानव का शरीर मिला है इसलिए प्रभु का
धन्यवाद् कीजिये जय श्री कृष्ण ! चंद्रसागर

Sunday, February 1, 2009

मानव जीवन का परम लक्ष्य भगवत्प्रेम की प्राप्ति:

मानव जीवन का परम लक्ष्य भगवत्प्रेम की प्राप्ति: आप अपने बच्चों को पढाते हैं, क्या उन्हें जीवन का लक्ष्य बतलाते हैं? यदि नौकरी करके पेट भरना ही जीवन का लक्ष्य है , तो पेट तो पशु भी भरते हैं मानवीय लक्ष्य्नों जैसे सत्य , इमानदारी , दया व जीव मात्र के प्रति यदि प्रेम भाव नही तो हम पशु समान ही हुए सत्यम का मालिक करोड़पति होकर भी चोर है, मुंबई का आई. पी.एस अधिकारी साजी ड्रग्स के धंधे में लिप्त है क्या ये पशु से भी अधिक नही हैं ?यदि सबके प्रति प्रेम होता तो अपने राष्ट्र से भी प्रेम होता जीव मात्र के प्रति प्रेम ही भगवत प्रेम में परिणत हो जाता है जिनके जीवन में प्रभु शरणागति का टिकेट प्राप्त हो जाता है , उनके जीवन में रोग, शोक, और भय नही होता यदि आप रोग, शोक और भय से मुक्त होना चाहते हैं तो तत्काल प्रभु शरणागति का टिकेट प्राप्त कर लीजिये प्रेम से गाइए :हरे कृष्ण हरे कृष्ण ,कृष्ण- कृष्ण हरे हरे हरे राम हरे राम , राम -राम हरे हरे शेष फ़िर .... चंद्रसागर